न्यायपालिका जिंदाबाद!

न्यायपालिका जिंदाबाद!

इसी एक सप्ताह में एक के बाद एक तीन दिन देश की न्यायपालिका के तीन ऐसे फैसले आए जो पूरे देश के समाचार माध्यमों की सुर्खियां बन गए। ये हैं तीन तलाक, निजता का अधिकार और आज बाबा गुरमीत। ऐसा लगता है कि इस देश में व्यवस्थापिका और कार्यपाालिका की अकर्मण्यता का बोझ भी न्यायपालिका के कंधों पर आ गया है। न्यायपालिका जिसे सबसे कम साधन और संसाधन दिये गये हैं वो बावजूद अपनी सारी कमीयों और खामियों के देश के संविधान की गरिमा को बरकरार रखने का अपना दायित्व निभा रही है। अगर देश में पर्याप्त न्यायिक सुधार हो जाएं तो क्या खूबसूरत समां हो! न्यायपालिका का गठन मुख्यत: जजों और वकीलों से होता है तथा वर्तमान में सेशन और उससे उच्च स्तर के सौ प्रतिशत जज वस्तुत: वकील ही है जिनकी सनद निलंबित है। ऐसे में यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि आज भी देश की सेवा में वकीलों का रोल कितना महत्वपूर्ण है।:— राजेश के. भारद्वाज, पत्रकारिता व जनसंचार स्नातक, संस्थापक संपादक वोटर, एडवोकेट राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर

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Rajesh K Bhardwaj

advocate Rajasthan High Court / Supreme Court. Founder editor newspaper named Voter. interested in system revolution. Savambu writer, poet....

2 thoughts on “न्यायपालिका जिंदाबाद!”

  1. Vishesh bat aapke lekh me”desh me pryapt nyayik sudhar ho Jaye to kya khubsurat shama ho”vichrniye h aajkal his prakar ke anubhav vihin magistrates ki posting ho rahi h bhagvan hi desh ka malik h.

  2. Vishesh bat aapke lekh me”desh me pryapt nyayik sudhar ho Jaye to kya khubsurat shama ho”vichrniye h aajkal jis prakar ke anubhav vihin magistrates ki posting ho rahi h bhagvan hi desh ka malik h.

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