ध्यान बटाओ अभियान

उसने तो बस
चंद लोगों के बीच
एक बार बोला

मगर उफ़ ये
निगोड़े टीवी चैनल!

उसके बेबोलों को
24 घंटे बिना रुके
दोहरा रहे हैं

ब्रेक विज्ञापन…
ब्रेक विज्ञापन…
चिल्ला रहे हैं

लगता है मजा
आ रहा है
“साहेब” को भी

मिलजुलकर सब
ध्यान बटाओ
अभियान चला रहे हैं

: राजेश

“कुछ तुमने कहा कुछ मैंने सुना”

रेल में यात्रा के दौरान मेरी सीट के पास दो मूक बधिर दोस्त बैठे थे, वे घंटो इशारों की भाषा में बात करते रहे।चुपचाप बिना किसी शोर शराबे के। वे बिना बोले और सुने एक दूसरे की भावनाओं को संप्रेषित कर पा रहे थे।

मेरे दिल में ख्याल आया कि एक वे हैं और दूसरी तरफ वाचालों इस दुनिया में हम लोग वाणी के शोर शराबे के बीच भी मूक बधिर हैं। बोलने और सुनने के बावजूद एक दूसरे की भावनाओं को संप्रेषित नहीं कर पा रहे हैं ! बस लगे हैं अपनी ही अपनी हांकने। कोई जानबूझकर बहरा है तो कोई गूंगा ! बस अपनी अपनी सुविधा के हिसाब से !

वे सचमुच दिव्यांग हैं!

कितनी अजीब सी बात है। है ना !

:- राजेश कुमार

क्यों चुना है मैंने तुम्हें !

क्यों चुना है मैंने तुम्हें !

अश्लीलता नहीं रोक सकते हो तो
चाहे फिल्में, टीवी,अखबारों और
विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दो!

नशे में बहकते कदमों को
नहीं थाम सकते हो तो
चाहे सारे मयखाने बंद करा दो !

बढती कामुक कुंठा
नहीं रोक सकते हो
तो चाहे सारे कुंठितों को
समंदर में फिंकवा दो

अपराध नहीं रोक सकते हो तो
चाहे सारी पुलिस को हटा कर
सैनिक शासन लगा दो !

मगर नहीं है मंजूर मुझे
नन्हीं मासूम बच्चियों
के बदन से खिलवाड !
मगर नहीं है मंज़ूर मुझे ये
रोज बढ़ते बलात्कार !

बलात्कारियों और हत्यारों
को तुरंत कठोर सजा दो!

नहीं रोक सकते अगर तुम इसे
तो क्यों हो तुम !
किस लिए हो तुम !
क्यों चुना है मैंने तुम्हें !!
ऐसे कैसे होगा
महिला सशक्तिकरण !!

मैं वोटर हूं !

:— राजेश कुमार

शिव भोले !

शिव भोले !
वंदन है तुम्हारे
चरणों में !
हलाहल को
कंठों में धरना
तुम्ही से
सीखा है शायद
हम वकीलों ने !

: राजेश कुमार
(मित्रों को पसंद आने पर आगे और भी लिखना चाहूंगा)

वो शख्स़ !

वो शख्स़ जब बोल रहा था
मानों दिल से सबको तौल
रहा था
उतरे चेहरे लटक गए थे
मानो राज़ वो गहरे
खोल रहा था
उसकी बाते सीधी जा
रही थी दिलों में
डरते हैं और डर गए थे
जिससे सब
आज वो उसी शख्स की
उसी के सामने बखिया
उधेड़ रहा था
कुछ मिनटों में वो
मानों समेट गया
सदियों को
वो शख्स़ भी अजीब था
ना जाने वो कितना
आहत होकर बोल रहा था
वो शख्स़ जब बोल रहा था
मानों दिल से सबको तौल
रहा था…..

लेखक:राजेश कुमार

अनुपम

अनुपम !!!

कुछ ऐसी बातें
होती हैं
जो जब दिल से
निकलती हैं तो
सीधे दिल में
उतर जाती हैं
और अगर कोई
कह दे सरे
महफ़िल
जो कोई उन्हें
तो दिल से
वाह की बजाय
निकलता है
अनुपम ! अनुपम !
अनुपम ! अनुपम !

लेखक : राजेश कुमार