मेरी एक पाती चंद्रशेखर आजाद के नाम !

जोधपुर 27 फरवरी 2016

पूज्यनीय पंडित जी,
सादर नमन!

नमन है आपकी शहादत को ! जिस देश की आजादी के लिए आपने 27 फरवरी 1931 को अपनी शहादत दी आपके उस प्यारे वतन के क्रूरता भरे दो टुकडे उसकी आजादी के एक दिन पूर्व 1947 में ही कर दिये गयेे थे। लाखों निर्दोष लोग बेदर्दी से कत्ल हुए।

मैं जानता हूं कि आप भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु की फाँसी रुकवाने के लिए जब आप जवाहरलाल नेहरू से बात करने के लिए साईकिल पर गये थे। आप लोगों में सादगी और त्याग था। आपके साथी अमर बलिदानी भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव भी इतने त्यागी थे कि उन्होंने फांसी की सजा के खिलाफ अपील करने से ही साफ मना कर दिया था।

लेकिन बाद का समय त्याग और तपस्या का नहीं रहा। जो भी सता में आया उसे सता के भोग का ऐसा चस्का लगा कि वो सता में आजन्म बना रहने की लालसा में देश की एकता और प्रेम को लगभग भूला ही बैठा। पांच सितारा जीवन शैली व अथाह धन कमाने की प्र​वृति की जनसेवकों में होड मच गई। वोट की राजनीति सर्वोच्च प्राथमिकता हो गई।

आज हालत ये ​है कि धर्म की तो बात ही क्या? देश को जाति जाति के नाम पर विखण्डित किया जाने लगा है। आपने कभी ऐसी कल्पना भी नहीं की होगी कि आपके इस देश में चुनी हुई सरकारें लोगो को बकायदा मोहर लगा लगा कर जाति प्रमाण पत्र बांटेगी, लेकिन आज ये बहुत सहजता से हो रहा है , भले ही आपको अटपटा लगे, और जनता भी इसके लिए लाइन लगाकर खडी ही नहीं वरन आपस में झगड भी रही है!

वोटों के लिए देशद्रोहियों का पक्ष भी सियासत लेने लगी है और इसमें किसी को कोई शर्म हया भी नहीं है। सेनानीयों और शहीदों तक को उनकी जाति के आधार पर गिना और याद किया जाने लगा है।

न्याय के क्षेत्र में भी कोई विशेष सुधार नहीं हुए हैं आज भी वो ही मैकाले की लि​खी दंड संहिता ही लगभग उसी स्वरूप में लागू है। और न्याय.. इस विषय में फिर और कभी लिखूंगा। खैर।

आपके इस प्यारे वतन में गंगा, गाय और गरीब की भंयकर दुर्गति होने लगी है, ये केवल वोट दोहन का ही साधन मात्र अब बचे हैं।

समर्थ लोगों के भयंकर उग्र हिंसक बलप्रदर्शन को ही मांगे मनवाने के लिए अभिव्यक्ति की कसौटी माना जाने लगा है। हाशिये में पडे असमर्थ सहाय की सुनने तो दूर, उसकी तरफ देखने तक के लिए कोई तैयार नहीं है।

ऐसा हो गया है आपका वो प्यारा वतन ! शेष… तो बस कुशल ही है। नमन !

आपका
राजेश कुमार
पत्रकारिता एंव जनसंचार स्नातक
संस्थापक संपादक वोटर
अधिवक्ता राज उच्च न्यायालय जोधपुर

Published by

Rajesh K Bhardwaj

advocate Rajasthan High Court / Supreme Court. Founder editor newspaper named Voter. interested in system revolution. Savambu writer, poet....

3 thoughts on “मेरी एक पाती चंद्रशेखर आजाद के नाम !”

    1. लेखक को नमन है। पूरे देश की भावना को शब्दों में पिरो दिया है

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