श्री भंवरलाल पुरोहित : एक अनूठा व्यक्तित्व !

बीकानेर से जोधपुर आकर राजस्थान उच्च न्यायालय में वकालत की सबसे पहले शुरूआत करने वाले यहां के वरिष्ठतम अधिवक्ता श्री भंवरलाल पुरोहित के स्वर्गवास की सूचना पाकर दिल धक सा रह गया। अभी कल परसों ही तो मैंने आदरणीय जे0एल0 पुरोहित जी से उनका हालचाल पूछा था व उनसे घर जाकर मिलने की इच्छा प्रकट की थी।

वृद्धावस्था के कारण आप श्री कुछ वर्षों से कोर्ट कम आ पाते थे लेकिन मेरी नजर हमेशा न्यायालय कारिडोर में घुसते ही उनकी सीट पर ही पडती थी। जिस दिन भी उनके दर्शन होते मैं उनके पास जाकर मिलता व आशीर्वाद लेकर स्वंय को धन्य महसूस करता। मैं ही क्यों हाईकोर्ट के सभी अधिवक्ता और मेरे युवा साथी उनसे इसी प्रकार की आत्मीयता का अनुभव करते थे। आपका विराट व्यक्तित्व सादगी, संजीदगी, अपनेपन और मार्गदर्शन से लबरेज जो था।

जब मैंने जोधपुर में वकालत की शुरूआत की तब मेरा पहले से कोई परिचय आप श्री से नहीं था। मगर सुखद सयोंग कुछ यूं रहा कि एक दिन मैं किसी मुकदमें में बहस कर रहा था तब माननीय न्यायालय ने मेरी याचिका पर एक तकनीकी आक्षेप लगाया उस समय आप श्री भी न्यायालय में बैठे हुए थे तथा जब मैं न्यायालय कक्ष से स्थगन लेकर बाहर निकला तो आप श्रीमान ने मुझे ना केवल मार्गदर्शन दिया अपितु शाम को अपने घर भी आमंत्रित किया तथा मेरे जाने पर मुझे अपने अनुभव के आधार पर जो मार्गदर्शन दिया उससे मैं चमत्कृत हो गया और अंतत: माननीय न्यायालय में मैं सफल भी रहा। उसके बाद तो मैं अक्सर आप श्री से मार्गदर्शन मांगता। कई बार समय लेकर घर जाकर मिलकर आता, लेकिन आप श्री ने कभी भी मुझसे किसी प्रकार की असहजता या झुंझलाहट प्रकट नहीं की बल्कि और अधिक अपनापन और स्नेह ही प्रकट किया। इतनी अधिक आयु के बावजूद आप श्री की स्मृति और वाणी दोनों ही बहुत स्पष्ट थी।

न्यायालय में बहस करते किसी अधिवक्ता को अगर कोई अन्य अधिवक्ता जो उससे ज्ञान या अनुभव में अधिक हो, मदद दे तो मेरे विचार में इससे फायदा अंतत: संपूर्ण न्यायिक बिरादरी को ही होता है। आप श्री ने इस मायने में अपने वरिष्ठ अधिवक्ता होने को सदैव बहुत ही सादगी,सहजता और अपनेपन से निभाया।

बीकानेर को आप श्री सदैव याद करते थे, जब भी मिलते तो ये भी पूछते कि बीकानेर कदै जा..आर आया…और सब ठीक है नी बठै…! एक दिन मैंने कहा कि आप भी पधारो बीकानेर तो आप श्री बोले कि अब जावणो कौनी होवे …बस याद ही करता रैवां बीकानेर ने तो…! इतना प्यार और लगाव था उनका बीकानेर से ! हो भी क्यों ना अपनी जन्म भूमि को कोई भूलता है भला!

होली स्नेह मिलन के लिए तो स्वंय बुलाकर आमंत्रित करते थे सबको। मैं और मित्र निमेश सुथार आप श्री के पास बैठने और अनुभवों को सुनने का लोभसंवरण नहीं कर पाते थे। वकालत व्यवसाय के उच्च मानदंडों, न्यायपालिका की गरिमा और बार तथा बैंच के बीच संतुलन आदि विषयों पर आप श्री के विचार सुस्पष्ट और अनुकरणीय होते थे।

आप श्री हमें छोडकर कहीं नहीं गये हैं, हमारे बीच आज भी हैं और और हमेशा रहेंगे…दिलों में ….यादों में….!!!

सादर श्रद्वाजंलि!

आदरणीय मित्रों लगभग इतनी ही आत्मीयता और अपनापन मुझे सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट परम आदरणीय स्व0 श्री बी0डी0 शर्मा जी से मिलती रही थी। अब जब भी दिल्ली जाता हूं तो उनके चैम्बर की ओर नजरे उठकर झुक जाती है। नमन!

कविवर गिरिजाकुमार माथुर ने ठीक ही लिखा है कि :—

जो है यथार्थ कठिन उसका तू कर पूजन—
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।

:— राजेश

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Rajesh K Bhardwaj

advocate Rajasthan High Court / Supreme Court. Founder editor newspaper named Voter. interested in system revolution. Savambu writer, poet....

One thought on “श्री भंवरलाल पुरोहित : एक अनूठा व्यक्तित्व !”

  1. बेहतरीन अंदाज़े बयां । fascinating personality he was . He himself always demonstrated as guide to the youngsters. Never let them feel alone at outstation.

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