स्वाइन फलू पीबीएम और सरकार के खोखले विज्ञापन !

परसों यानि 21 फरवरी को मैं अपने होम टाउन बीकानेर में था। मुझे कुछ खांसी व सिरदर्द की तकलीफ होने पर मैंने राजस्थान सरकार के स्वाइन फलू बचाव के विज्ञापनों से प्रेरित होकर, बरसों बाद संभाग के सबसे बडे अस्पताल राजकीय पीबीएम हास्पिटल जाना उचित समझा। वक्त लगभग दोपहर के तीन बजे। मैंने सर्वप्रथम वहां बनी इमरजेंसी में इस आ​शा से प्रवेश किया कि स्वाइन फलू के इस प्रकोप में संभवत: वहां आपातकालीन व्यवस्था के रूप में मुझे चिकित्सा मिल जायेगी। वहां प्रवेश करने पर मैंने पाया कि सभी कर्मचारियों ने अपने मुंह पर मास्क बांध रखे थे व अदितीय गंदगी, बदबू, घुटन व उमस इतनी ज्यादा थी कि मेरा वहां खडे रहना तक मुश्किल था।

मैंने हिम्मत करके पूछा तो पहले तो मुझे मेडिसीन के डाक्टर साब से मिलने को कहा गया जब मैं वहां गया और अपनी तकलीफ बताई तो उन्होंने कहा कि 16 नम्बर कमरे में जाओ। मैं जब 16 नम्बर कमरे का पता करने के लिए इन्क्वायरी पर गया तो वहां मौजूद व्यक्ति ने कहा कि कल आना अब छुटटी हो चुकी है। तब मैंने एकबार पुन:इमरजेंसी में जाने की सोची फिर मन में ये ख्याल आया कि वहां जाने पर कहीं ना होने पर भी वास्तव में ही स्वाइन फलू से संक्रमित ना हो जाउं क्योंकि वहां की गंदगी, बदबू, घूटन व सफोकेशन नाकाबिले बर्दाश्त थी। और मैंने इसप्रकार वापस घर की राह पकडनी ही उचित समझी। मुझे नहीं लगता कि राजस्थान सरकार, चाहे वो किसी पार्टी की सरकार हो, के अस्पतालों में किसी जन साधारण को बचाने की वास्तव में कोई व्यवस्था है। हां वीआईपीज के लिए तो सबकुछ है ही। बातें है बातों का क्या….!!

मैं अपने कई मित्रों को इस अस्पताल के बाहर सफाई ​अभियान के तहत झाडू लगाते फेसबुक पर देखता हूं तो अच्छा लगता है मगर मेरा उनसे ये विनम्र अनुरोध है ​कि अगर वे पहले इस अस्पताल के भीतर की सफाई करवा दें तो ही उनका ये ​अभियान सफल हो सकता है वरना तो ये बाकि बचे चार साल चार दिन में बीत जायेंगे।

:— राजेश